Parenting | खानपान पर रोक-टोक से अच्छा बच्चों की रोग प्रतिरोधी क्षमता का करें विकास

ParentingParenting Tips | मां अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति बहुत सजग रहती हैं। उनका पूरा ध्यान इस बात पर रहता है कि उनके बच्चे सेहतमंद रहें, ठीक खाना खाएं, समय पर सोएं, स्कूल में अच्छा परफॉर्म करें। जहां एक तरफ ज्यादातर माताएं बच्चों की शारीरिक सेहत के प्रति बहुत सावधान होती हैं, तो वहीं दूसरी तरफ वे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान नहीं देतीं। अपनी सावधानी में मां यह भूल जाती हैं कि उनके व्यवहार का बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। संपूर्ण विकास के लिए शारीरिक के साथ ही मानसिक विकास भी जरुरी है।

बार-बार ‘न’ सुनने का बच्चों के मनोविज्ञान पर असर 

तेजी से बदलते मौसम देख माताएं चिंतित हो जाती हैं। उनके पास केवल एक विकल्प बचता है और वो है अपने बच्चों की दैनिक गतिविधियों को नियंत्रित करके उन्हें सेहतमंद आहार के लिए मजबूर करना। इसके लिए उन्हें खाने-पीने की कई चीजों को न कहना पड़ता है। बार-बार ‘न’ सुनने का बच्चों के मनोविज्ञान पर क्या असर पड़ता है और बार-बार मना करने पर बच्चों के संपूर्ण विकास एवं उनके व्यक्तित्व पर क्या असर पड़ेगा इस बारे में मनोवैज्ञानिक की राय जानें।

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मनोवैज्ञानिकों के अनुसार बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं। वे अपने माता-पिता को देखकर सीखते हैं, जिससे उनके व्यक्तित्व का विकास होता है। अपने माता-पिता से बार-बार ‘न’ सुनकर बच्चे झूठ बोलने या फिर अपने माता-पिता से चीजें छिपाने लगते हैं। इससे उनके आत्मविश्वास को नुकसान पहुंचता है और वे सामाजिक रूप से अलग रहने लगते हैं।

असली समस्या बच्चे की मांग नहीं, बल्कि उनका कमजोर प्रतिरोधी तंत्र

उन्होंने कहा, इन चीजों से मां और बच्चे के बीच संबंध खराब हो सकते हैं, इसलिए यह जरूरी है कि मां को एहसास हो कि असली समस्या बच्चे की मांग नहीं, बल्कि उनका कमजोर प्रतिरोधी तंत्र है, जिस कारण वे बार-बार बीमार पड़ते हैं।

माताएं बच्चों को ‘न’ इसलिए कहती हैं कि वे उनके संपूर्ण विकास के लिए फिक्रमंद होती हैं। कामकाजी माताओं के बच्चे कई बार उनकी निगरानी के बिना खाते-पीते हैं, जिस कारण माताओं के लिए यह तय करना बहुत मुश्किल हो जाता है कि उनके बच्चे को सभी जरूरी पोषक तत्व प्राप्त हो रहे हैं या नहीं।

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जो बच्चे अपने माता-पिता से लगातार उपेक्षित रहते हैं, वे स्वभाव से बहुत ज्यादा अंतर्मुखी हो जाते हैं। उनमें आत्मविश्वास की कमी तथा असुरक्षित व्यक्तित्व होता है। कई बच्चे निर्णय लेने में असमर्थ रहते हैं, क्योंकि वे यह तय नहीं कर पाते कि वे जो कर रहे हैं, वह सही है या गलत। उनका सामाजिक कौशल काफी खराब होता है और वयस्क होने पर अपने कार्यस्थल पर टीम के अच्छे सदस्य नहीं कहलाते।

सबसे अच्छा समाधान यह है कि बच्चों को ऐसा मल्टीविटामिन या मल्टीमिनरल सप्लीमेंट दिया जाए, जो उन्हें कुछ पोषक तत्वों का सौ प्रतिशत आरडीए प्रदान करे, जो न केवल आहार में अनुपस्थित पोषक तत्वों की कमी को पूरा करे, बल्कि बच्चे की प्रतिरोधी क्षमता का भी विकास करे। मजबूत बच्चों की मां को कम चिंता होती है, इसलिए प्रसन्नचित्त, सकारात्मक एवं मजबूत बच्चे का विकास होने दीजिए। अच्छा प्रतिरोधी सिस्टम सेहतमंद शरीर के साथ सेहतमंद मस्तिष्क भी प्रदान करता है।

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